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- राजेंद्र सिंह
कासगंज। जिले के गंजडुंडवारा ब्लॉक स्थित कादरगंज घाट लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां लगने वाला मेला भी काफी पुराना है और स्थानीय लोगों के मुताबिक कादरगंज का मेला और घाट मुगलकाल से ही चले आ रहे हैं। इसके बावजूद इतने लंबे समय के बाद भी घाट का अपेक्षित विकास नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का कहना है कि कादरगंज घाट पर आज भी पक्का घाट, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा जैसी जरूरी सुविधाओं का अभाव है। रात के समय अंधेरा रहने के कारण श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
वहीं, गंगा में जलस्तर बढ़ने और स्नान के दौरान हादसों की आशंका को देखते हुए घाट पर मजबूत बैरिकेडिंग की जरूरत भी महसूस की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन को इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से कादरगंज घाट पर पक्की सीढ़ियों के निर्माण और अन्य आवश्यक सुविधाओं के साथ स्थायी विकास कराने की मांग की है। इसके अलावा गंगा किनारे मजबूत बैरिकेडिंग लगाने तथा रात के समय पर्याप्त रोशनी के लिए सोलर प्लेट और सोलर लाइटें लगाने की मांग भी उठाई गई है।
ग्रामीणों का मानना है कि इन सुविधाओं के विकसित होने से श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत मिलेगी और घाट पर सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।
इस मांग को लेकर ग्रामीणों में बहुरनलाल, पूर्व प्रधान चरण सिंह, सुरेश चंद्र और नेमचंद्र सक्सेना सहित अन्य लोग शामिल हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कादरगंज घाट के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए इसके विकास पर विशेष ध्यान देने की अपील की है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि आस्था के इस पुराने केंद्र को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और बेहतर माहौल मिल सके।









