लखनऊ: राजधानी लखनऊ में अवैध डेयरियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बाद जब्त की गई भैंसों की नीलामी को लेकर सोमवार को नगर निगम मुख्यालय में जमकर हंगामा हुआ। नीलामी का विरोध करने के लिए आजाद समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी यूथ ब्रिगेड के कार्यकर्ता नगर निगम पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने नीलामी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जब्त पशुओं को उनके पुराने मालिकों को वापस करने की मांग की।
दरअसल, लखनऊ के पारा और आसपास के इलाकों में अवैध डेयरियों के खिलाफ नगर निगम ने अभियान चलाया था। इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में भैंसों को जब्त किया गया था। नगर निगम की ओर से इन पशुओं को अलग-अलग कांजी हाउस और गोशालाओं में रखा गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, नीलामी में 240 से अधिक पशुओं को शामिल किया गया।
सोमवार को नगर निगम मुख्यालय में नीलामी की प्रक्रिया शुरू होते ही विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच नोकझोंक की स्थिति भी बनी। कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेजे जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
नगर निगम ने नीलामी के लिए प्रत्येक भैंस की शुरुआती कीमत करीब 20,500 रुपये तय की थी। नीलामी में शामिल होने वालों के लिए धरोहर राशि जमा करने की शर्त भी रखी गई थी। साथ ही, जिन पशुपालकों से अभियान के दौरान पशु जब्त किए गए थे, उन्हें खुद या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से उन पशुओं को दोबारा खरीदने की अनुमति नहीं थी।
विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं का आरोप था कि नीलामी से पशु मालिकों को नुकसान होगा और उनकी मांग थी कि जब्त की गई भैंसों को वापस करने के मामले पर प्रशासन पुनर्विचार करे। दूसरी तरफ नगर निगम का कहना है कि अवैध डेयरियों के खिलाफ चलाए गए अभियान और जब्त पशुओं की आगे की कार्रवाई निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच नगर निगम मुख्यालय में काफी देर तक राजनीतिक कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बनी रही। भैंसों की नीलामी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा भी बनता दिखाई दे रहा है।
फिलहाल लखनऊ में भैंसों की नीलामी और उसके विरोध को लेकर मामला चर्चा में है। एक तरफ नगर निगम अपनी कार्रवाई को नियमों के तहत बता रहा है, तो दूसरी तरफ आजाद समाज पार्टी और सपा से जुड़े कार्यकर्ता नीलामी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।









