मेरठ में SSP अविनाश पांडे पर विवाद के बाद बड़ा एक्शन, लखनऊ मुख्यालय भेजे गए,एक दलित किसान नेता को अपने दफ्तर बुलाकर दो घन्टे तक पिटाई करना पङा भारी।

  • मेरठ। ललिता गौतम मामले को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडे विवादों में घिर गए हैं। प्रदर्शन के दौरान सामने आए वीडियो में उन्हें एक प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते हुए देखा गया, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठे।

मामला उस समय और गरमा गया जब ललिता गौतम प्रकरण में न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस के बीच कलेक्ट्रेट के बाहर झड़प हुई। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग किया। इसी दौरान SSP अविनाश पांडे का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह पुलिस वाहन के अंदर मौजूद एक युवक को थप्पड़ मारते दिखाई दिए। वीडियो वायरल होने के बाद इस घटना पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

इसके बाद अविनाश पांडे पर एक अन्य गंभीर आरोप भी सामने आया। किसान नेता दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया कि उन्हें पुलिस कार्यालय ले जाकर उनके साथ मारपीट की गई। हालांकि, SSP अविनाश पांडे ने इन आरोपों को खारिज किया है। मामले में अब जांच और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

इसी विवाद के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने मेरठ के SSP अविनाश पांडे का तबादला कर दिया और उन्हें लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध किया गया। यह कार्रवाई 20 अगस्त को सामने आई तबादला सूची के बाद हुई।

वहीं, 21-22 अगस्त को मेरठ में कथित पुलिस मारपीट के एक अलग मामले ने भी तूल पकड़ लिया। नए SSP ने किसान नेता से मारपीट के आरोप में इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ समेत आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया और जांच के निर्देश दिए। DIG स्तर पर भी घटनास्थल, CCTV फुटेज और पुलिस रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की जवाबदेही, प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार और हिरासत में लिए गए लोगों के अधिकारों को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। हालांकि, मारपीट से जुड़े कई आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और आरोपों को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।

  • कुल मिलाकर, ललिता गौतम मामले से शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शन, SSP के वायरल वीडियो और बाद में सामने आए हिरासत में मारपीट के आरोपों ने मेरठ पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया। इसके बीच अविनाश पांडे का तबादला इस पूरे विवाद में सरकार की ओर से उठाया गया एक बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।

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